जिला न्यायालय में मारपीट और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई। चार अधिवक्ताओं से 10 वर्षों का आयकर रिकॉर्ड और संपत्ति का पूरा ब्योरा भी मांगा गया।

लखनऊ जिला न्यायालय में एक वादकारी और दिल्ली से आए अधिवक्ताओं के साथ कथित मारपीट तथा न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चार अधिवक्ताओं के जिला न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर गठित विशेष पीठ ने सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा के न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अंतरिम प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही चारों अधिवक्ताओं को पिछले 10 वर्षों के आयकर रिटर्न, अपनी और परिवार की चल-अचल संपत्तियों, व्यवसाय तथा पिछले पांच वर्षों में खरीदी और बेची गई संपत्तियों का पूरा विवरण शपथपत्र के साथ अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह का व्यवधान स्वीकार नहीं किया जाएगा और न्याय वितरण प्रणाली की गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकांश अधिवक्ता पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ अपने दायित्व निभाते हैं, लेकिन अधिवक्ताओं के वेश में मौजूद कुछ ‘काली भेड़ों’ की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना समय की आवश्यकता है।
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