मुंबई: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत में ऐसा खुलासा किया है, जिसने जांच को नया मोड़ दे दिया है। एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से पहले केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए लाखों रुपये का लेन-देन किया गया था।

CBI का दावा: 5 लाख रुपये देकर हासिल किए गए थे प्रश्न
विशेष अदालत में दाखिल अपने जवाब में CBI ने बताया कि लातूर स्थित एक कोचिंग संस्थान के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने कथित तौर पर NTA के पेपर-सेटर पैनल से जुड़े पीवी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये का भुगतान किया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, मोटेगांवकर ने अपनी बेटी का दाखिला कुलकर्णी की कोचिंग में कराया था, जहां से कथित रूप से परीक्षा से जुड़े प्रश्न उपलब्ध कराए गए।
मोबाइल फोन से मिले अहम डिजिटल सबूत
CBI ने अदालत को बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन की जांच के दौरान हाथ से लिखे गए केमिस्ट्री के प्रश्नों की 132 तस्वीरें बरामद हुई हैं। एजेंसी का दावा है कि इन तस्वीरों के मेटाडेटा से पता चलता है कि इन्हें 3 मई को, यानी परीक्षा से करीब दस दिन पहले लिया गया था।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच में सामने आया कि इन 132 प्रश्नों में से 111 प्रश्न NTA के मास्टर क्वेश्चन सेट से पूरी तरह मेल खाते हैं, जिससे पेपर लीक की आशंकाओं को और बल मिला है।
सह-आरोपी के जरिए बरामद हुई रकम
CBI के मुताबिक, लीक हुए प्रश्नों के एवज में दी गई रकम की जानकारी और उससे जुड़े साक्ष्य सह-आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे के माध्यम से सामने आए हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले में कई स्तरों पर साजिश रची गई थी, जिसकी जांच अभी जारी है।
अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज की और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क
CBI का मानना है कि यह मामला केवल प्रश्नों के लीक होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन और आरोपियों के आपसी संबंधों की गहन जांच कर रही है।






















